मेरी नई दर्द शायरी, माफ़ नहीं कर सकते…

meri dard shayari, bilkul new

चाहा था जिसको खुद से भी ज्यादा,
पूजा की थी जिसकी खुदा से ज्यादा

अपने ने ही तड़पाया है गैरो से भी ज्यादा।

इतनी मोहब्बत की नफरत कर नहीं पाते,
इतना दर्द दिया है मुस्कुरा भी नहीं पाते।

बस एक सवाल खुद से करता हूँ –
क्यों भूल की प्यार करने की,

और अगर की भी तो –
क्यों भूल की उसको अपनी तकदीर बनाने की।

पर सवाल ये भी है की उसने ऐसी बेवफाई क्यों की,
हमने तो अपना सब कुछ वाफ दिया –
फिर भी मेरे प्यार को वो क्यों न समझी।

तोड़ दिया दिल, दे दिया दर्द उम्र,
माफ़ नहीं कर सकते उसको –
क्या हुआ जो चाहा था उसको जीवन भर के लिए।

पता नहीं उसे बदुआ दूँ या उसकी ख़ुशी की प्रार्थना खुदा से करूँ –
कम्बख्त जितनी भी कोशिश कर बदुआ दे नहीं सकता,
शायद उसके आंसू मैं आज भी देख नहीं सकता।

जिसके आंसू हमेशा पौंछना चाहा उसी ने हमें रोने को अकेला छोड़ दिया,
जिसके हर गम को दूर करना चाहा उसी ने उम्र भर का गम हमें दे दिया।
जो भी हो मैं खुद से नफ़रत कर सकता हूँ पर उससे नहीं,
इसलिए मैं आज भी बस यही दुआ करता हूँ की वो खुश रहे,
क्या हुआ जो उसने हमारी आँखों में आंसू दे दिया, उसके होंठो पर मुस्कराहट बानी रहे।