हिंदी ग़ज़ल बहारें आके चली जायेंगी

बहारें आके चली जायेंगी तो क्या होगा
उनकी बस यादें ही रह जायेंगी तो क्या होगा

अभी है वक़्त हसरतों को पूरा करने की
वर्ना जब हसरतें पछताएंगी तो क्या होगा

ख्वाहिशें दिल में उठी हैं न दबा तू उनको
दिल ही दिल में वो रह जायेंगी तो क्या होगा

अपनी किस्मत को अपने हांथों से लिख लेना “फ़िज़ा”
लकीरें हाथों की मिट जायेंगी तो क्या होगा।